Heartbreak Diaries (Vol. 2): Tanhaiyon Ka Safar
- Music Album Released 18 March, 2026
- Lyrics written by Abu Sayed
- Language Hindi
- Songs 5
Heartbreak Diaries (Vol. 2): Tanhaiyon Ka Safar is not just an album; it is an emotional odyssey crafted by the gifted artist Abu Sayed. Released on March 18, 2026, this sonic masterpiece invites listeners to walk through the silent, rain-soaked streets of memory, where every whisper of the wind carries the weight of a forgotten love.
Blending the rich orchestration of cinematic Bollywood ballads with deeply personal, soulful vocals, Abu Sayed creates a universe where melancholy is beautiful. The album—titled Tanhaiyon Ka Safar (The Journey of Loneliness)—serves as a companion for anyone navigating the complex tides of heartbreak, nostalgia, and the quiet pain that lingers in the spaces between memories.
Table of contents
Why This Album Resonates
If you are a fan of sad romantic songs, emotional love songs, or the timeless appeal of nostalgic melodies, this album speaks directly to the soul. The atmospheric production and poetic lyricism capture the precise moment when love turns into memory, making it a perfect addition to playlists for rainy days, late-night drives, or moments of deep introspection.
The Journey: Track-by-Track Breakdown
Embark on the auditory journey of Tanhaiyon Ka Safar:
- 00:00 – Gumshuda Rooh (The Lost Soul)
The album opens with a hauntingly beautiful plea. “Gumshuda Rooh” sets the tone with its sparse instrumentation and raw, aching vocals, painting a picture of a spirit searching for its other half in the ruins of the past. - 06:34 – Sadiyon Ki Pyaas (A Thirst for Centuries)
A grand, cinematic ballad that builds from a gentle whisper to a powerful crescendo. This track captures the timeless, desperate longing for a love that feels eons old, blending classical undertones with modern Bollywood heartbreak music sensibilities. - 12:59 – Dard-e-Dil Ki Dawa (The Cure for Heartache)
In a twist of poetic irony, this song explores the idea that the pain itself becomes the only medicine. It is a deep, contemplative track about accepting sorrow as a part of love’s enduring legacy. - 19:26 – Gumshuda Rooh (Special Version)
A reimagined journey back to the lost soul. This version strips back the layers further, offering a more intimate, acoustic perspective that feels like a private diary entry—raw, vulnerable, and immediate. - 25:58 – Sadiyon Ki Pyaas (Special Version)
The album concludes with a reprise of its central epic. This version leans deeper into the atmospheric production, allowing the instruments to breathe and the silence between notes to speak volumes about the void left by lost love.
Album Details
- 🎤 Artist: Abu Sayed
- 🎧 Album: Heartbreak Diaries (Vol. 2): Tanhaiyon Ka Safar
- 📅 Release Date: March 18, 2026
- 🎶 Genre: Bollywood Heartbreak, Sad Romantic Songs, Emotional Ballads, Nostalgic Music
- 🌍 Language: Hindi / Urdu (Ballad Style)
Lyrics
Gumshuda Rooh
मेरी रूह… मेरी रूह…
गुमशुदा…
खामोशी की दीवारों से तेरी सदा आती है
टूटे आईने में तेरी ही शक्ल नज़र आती है
साँसें तो चलती हैं पर धड़कनें हैं रुकी हुई
मेरी दुनिया तेरे जाने से है कहीं खोई हुई
ये जिस्म तो है यहाँ, पर जान है लापता
हर आहट पे लगता है कि तूने पुकारा है
इन वीरान आँखों को बस तेरा ही सहारा है
ये कैसा वहम है, ये कैसा अँधेरा है
मेरा होकर भी अब कुछ भी ना मेरा है
मैं बन गया हूँ एक गुमशुदा रूह
तेरी यादों के सायों में मजरूह
ना दिन में चैन है, ना रातों में सुकूँ
ये इश्क़ मेरा बन गया मेरा जुनूँ
मेरी रूह… गुमशुदा…
वो बारिश की रातें, वो भीगी सी मुलाकातें
अब ज़हर सी लगती हैं वो तेरी मीठी बातें
जिस रास्ते पे चलते थे हम हाथ थाम कर
अब वो रास्ता भी पूछता है, गया तेरा हमसफ़र किधर
हर नज़ारा एक सज़ा है, हर लम्हा है पराया
हर आहट पे लगता है कि तूने पुकारा है
इन वीरान आँखों को बस तेरा ही सहारा है
ये कैसा वहम है, ये कैसा अँधेरा है
मेरा होकर भी अब कुछ भी ना मेरा है
मैं बन गया हूँ एक गुमशुदा रूह
तेरी यादों के सायों में मजरूह
ना दिन में चैन है, ना रातों में सुकूँ
ये इश्क़ मेरा बन गया मेरा जुनूँ
मेरी रूह… गुमशुदा…
कभी बंद कमरों में कोई परछाईं चलती है
तेरे ना होने की वहशत सीने में पलती है
अक्सर दीवारों पे दिखती है तेरी सूरत मुझे
ये मेरा पागलपन है या तू सच में है यहीं कहीं
ये तन्हाई अब एक मकड़ी का जाला है
अब ना कोई उम्मीद है, ना कोई तमन्ना है
इस रूह को तो बस अब भटकते ही रहना है
कहते हैं वक़्त हर ज़ख्म को भर देता है
मेरा ज़ख्म तो हर पल और गहरा होता है
मेरा वजूद अब एक अधूरा फ़साना है
क्या तू भी मुझे सोचकर यूँ ही बेचैन होती है?
या बस मेरी ही रूह इन अँधेरों में रोती है?
इक सवाल बन के रह गया है मेरा प्यार
क्या ख़त्म होगा कभी ये लंबा इंतज़ार?
या मैं ही क़ैद हूँ तेरी यादों की सलाखों में?
मैं बन गया हूँ एक गुमशुदा रूह
तेरी यादों के सायों में मजरूह
ना दिन में चैन है, ना रातों में सुकूँ
ये इश्क़ मेरा बन गया मेरा जुनूँ
मेरी रूह… गुमशुदा…
गुमशुदा…
मेरी रूह…
तेरे बिना…
मैं कुछ भी नहीं…
बस एक… गुमशुदा रूह…
Sadiyon Ki Pyaas
आँखों में… बस एक नमी है…
साँसों में… तेरी ही कमी है…
ये कैसी लगी है… सदियों की प्यास है…
गुज़रता हूँ जब उन वीरान गलियों से
जहाँ वक़्त ठहरा है परछाइयों में
दीवारों पे लिखी हैं टूटी कहानियाँ
सिसकती हैं दरारों से तेरी निशानियाँ
हर आहट पे लगता है तूने पुकारा मुझे
एक धुंध सी छाती है, चारों पहर
दिल डूबता जाता है, गहरा, और गहरा
यादों का ज़हरीला है ये कैसा असर…
ये सदियों की प्यास है, जो बुझती नहीं
एक रूह की तलाश है, जो मिलती नहीं
हर जन्म में खोजा तुझे, हर मौत में हारा
मेरे नसीब का तू, टूटा हुआ तारा
ये कैसी सज़ा है… ये कैसी सज़ा है…
चेहरे बदलते हैं, आईने वही हैं
ज़माने गुज़र गए, हम भी अब वो नहीं हैं
पर आँखों के अंदर वो खालीपन वही है
तुझे खोने का वो अँधेरा घना वही है
हर चेहरे में तेरा ही अक्स ढूँढता हूँ
एक ख़ौफ़ सा रहता है, दिल के अंदर
जैसे रेत पे चल रहा हूँ, एक बंजर समंदर
हर साँस एक बोझ है मेरे जिस्म पर…
ये सदियों की प्यास है, जो बुझती नहीं
एक रूह की तलाश है, जो मिलती नहीं
हर जन्म में खोजा तुझे, हर मौत में हारा
मेरे नसीब का तू, टूटा हुआ तारा
ये कैसी सज़ा है… ये कैसी सज़ा है…
कभी लगता है ये मेरा वहम ही तो है
एक अधूरा सा, डरावना सा ख़्वाब ही तो है
शायद तुम थे ही नहीं, बस एक एहसास था
जो सदियों से मेरे जीने की इक आस था
पर ये दर्द हक़ीक़त की तरह चुभता क्यों है?
मैं भटकता हूँ बनके एक साया बेनाम
ना मेरी सुबह है, ना है कोई शाम
एक अंतहीन सफ़र, एक अंतहीन इंतज़ार
क्या मिलेगा कभी मुझे इस क़ैद से फ़रार?
या यही मेरी मंज़िल, यही मेरा अंजाम है?
क्या नाम था तेरा… मुझे याद भी नहीं…
कैसा था चेहरा तेरा… कोई फ़रियाद भी नहीं…
बस एक प्यास है, जो रूह को जलाती है
हर धड़कन में मौत का पैग़ाम लाती है
मेरे होने पर ही अब मुझे शक सा है…
ये सदियों की प्यास है, जो बुझती नहीं
एक रूह की तलाश है, जो मिलती नहीं
हर जन्म में खोजा तुझे, हर मौत में हारा
मेरे नसीब का तू, टूटा हुआ तारा
ये कैसी सज़ा है… ये कैसी सज़ा है…
सदियों की… ये प्यास…
बुझती नहीं…
एक तलाश…
मिलती नहीं…
ये प्यास… सदियों की प्यास…
Dard-e-Dil Ki Dawa
कहाँ मिलेगी दवा? मेरे इस दर्द-ए-दिल की?
साँसें हैं ये सज़ा, या है ये कोई बेबसी?
रूह काँपे, दिल जले, हर तरफ बस तेरी कमी…
बस तेरी कमी…
अंधेरी रातें, ख़ामोश साये,
दीवारों से बस तेरी आवाज़ आये।
हर एक लम्हा सदियों सा गुज़रे,
बिन तेरे ये दिल अब कहाँ जाए।
ये ख़ालीपन एक ख़ौफ़ सा लगता है।
मेरी रूह में उतरा है, तेरा वो गहरा नशा,
भूलना चाहा जितना, उतना ही याद आया।
हर धड़कन पूछती है, क्या थी मेरी ख़ता?
तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा,
क्यूँ दी ये सज़ा, बस इतना बता।
मेरी अँधेरी दुनिया में, ना कोई है तेरे सिवा,
अब तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा।
वो भीगी आँखें, वो तेरा मुस्कुराना,
एक पल में सारी दुनिया को भूल जाना।
अब वही हँसी कानों में चुभती है,
तेरी परछाई भी अब मुझसे छुपती है।
हर ख़्वाब मेरा शीशे सा टूटा है।
मेरी रूह में उतरा है, तेरा वो गहरा नशा,
भूलना चाहा जितना, उतना ही याद आया।
हर धड़कन पूछती है, क्या थी मेरी ख़ता?
तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा,
क्यूँ दी ये सज़ा, बस इतना बता।
मेरी अँधेरी दुनिया में, ना कोई है तेरे सिवा,
अब तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा।
कमरे की हर चीज़ पूछती है तेरा पता,
आईने में अक्स तेरा, मुझसे ही है ख़फ़ा।
ये वहम है या हक़ीक़त, कुछ समझ ना पाऊँ,
मैं तुझमें खोकर, ख़ुद को कहाँ पाऊँ।
तेरी यादें ज़ंजीरें बन गयी हैं।
अब तो आदत सी है इन ज़ख़्मों संग जीने की,
तेरी यादों के सहारे अश्कों को पीने की।
कोई उम्मीद नहीं, ना कोई है आसरा,
बस तेरा ही ख़याल है जो देता है दिलासा।
ये दिलासा भी एक वहम सा लगता है।
ये कैसा माया-जाल है, कैसा है ये घेरा,
न तुझसे दूर जा सकूँ, न पास है सवेरा।
मेरी हर दुआ में तू, हर बद्दुआ में भी,
तुझसे ही शुरू ज़िन्दगी, ख़त्म भी तुझपे ही।
मेरी तक़दीर का फ़ैसला अब तू ही सुना।
तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा,
क्यूँ दी ये सज़ा, बस इतना बता।
मेरी अँधेरी दुनिया में, ना कोई है तेरे सिवा,
अब तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा।
दवा… या सज़ा…
दर्द… बस दर्द…
तेरा दिया हुआ…
हमेशा के लिए…
दवा…
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