Zahra Ki Duaon Ka Asar
- Written by Abu Sayed
Abu Sayed is a full-stack developer and ambient music artist from Dhaka, Bangladesh. Specializing in Laravel, Unity, and AI integration, he creates innovative web and mobile applications. As the founder of Ai Blogify and ToolsNess, Abu develops SaaS products and contributes to open-source projects. His tech expertise is matched by his musical talent, earning him recognition in Bangladesh's ambient music scene. A Computer Science graduate, Abu combines technical skills with creative expression to deliver unique digital solutions. Explore his blog for insights on web development, AI, and the intersection of technology and music.
Zahra Ki Duaon Ka Asar
(Ooh)
(Aah)
(Mmm)
(Maula Ali… Maula Ali…)
Dard mein doobi ye fiza hai
Har dil mein bas ek hi sada hai
Zahra ki duaon ka asar hai
Ye Ali ke gharane ka asar hai
Ilm ka darwaza, woh mard-e-khuda
Sher-e-Khuda hai naam, sab se juda
Khaibar ki diwarein bhi kaapi thi wahan
Jab utha tha Haidar ka woh parcham-e-shaan
Himmat aur sabr ka jo behta samundar hai
Haq ki raah dikhata wohi toh rehnuma hai
(Ya Ali… Ya Ali…)
Duniya ki har mushkil ka hal unke dar pe hai
Sajdon ki haseen roshni unke ghar pe hai
(Mmm-yeah)
Zahra ki duaon ka asar hai
Haq ke raste ka ye safar hai
Ali ki shuja’at, nabi ki mohabbat
Isi mein toh jannat ka noor-e-nazar hai
Zahra ki duaon ka asar hai
(Aah-yeah)
Hassan ka woh sabr, Hussain ki qurbaani
Khoon se likhi hai ek aisi kahani
Nana ki aankhon ka woh nooraani taara
Fatima ke chaman ka woh phool hai pyaara
Mohammad ke dil ka jo hissa hai pyara
Inke hi dam se hai deen ka sahara
(Ya Hussain… Ya Hassan…)
Mushkil kushaye waqt hai woh har pal hamare
Zulm ke andhero mein wahi toh hain sitare
(Oh-yeah)
Zahra ki duaon ka asar hai
Haq ke raste ka ye safar hai
Ali ki shuja’at, nabi ki mohabbat
Isi mein toh jannat ka noor-e-nazar hai
Zahra ki duaon ka asar hai
(Mmm-yeah)
Quran ki aayat har lab pe saji hai
Inke hi ishq se ye duniya basi hai
Na shirk hai dil mein, na koi gumaan
Maula ki ulfat hi hai hamari pehchan
Ek silsila hai jo chalta rahega
Zahra ka chaman har pal mehkta rahega
(Ya Zahra… Ya Zahra…)
Zahra ki duaon ka asar hai
Haq ke raste ka ye safar hai
Ali ki shuja’at, nabi ki mohabbat
Isi mein toh jannat ka noor-e-nazar hai
Zahra ki duaon ka asar hai
(Haidar… Haidar… Haidar…)
(Maula Ali…)
The Price of Hunger
The foundation we built was so steady and wide,
So steady and wide
Now it’s just ghosts and the secrets you hide.
Secrets you hide
You loved the currency, not the person inside,
Person inside
Greed was the poison that lived by your side.
It only takes one bad heart to break the chain,
To turn a beautiful home into nothing but pain.
You traded the gold for the rust and the rain,
Left us all hollow just for your gain.
Just for your gain!
I watched as the walls turned to paper and thin,
As you let the cold of the market place in.
Saeed remembers the warmth on your skin,
Before you made money your only next of kin.
It only takes one bad heart to break the chain,
To turn a beautiful home into nothing but pain.
You traded the gold for the rust and the rain,
Left us all hollow just for your gain.
Just for your gain!
One life, one lie, enough to erode,
The love that we carried, the life that we owed.
The equity’s vanished, the lights have all glowed,
Over the fragile, where once we were bold.
Now the echoes are all that remain in the hall,
The price for your hunger has totaled it all.
I stood by the window and watched the sky fall,
As the ghost of our family answered your call.
Mmm, yeah…
Just for your gain…
Greed, oh greed…
Just for your gain…
ये खामोशी का शोर…
मुझे सोने नहीं देता…
ये खामोशी का शोर…
किसी का होने नहीं देता…
सूनी राहें, भीगी पलकें, हर तरफ तेरा ही साया है,
इन दीवारों से पूछता हूँ, किसने इनको यूँ सजाया है।
तेरी आहट का वहम मुझको, अब हकीकत लगने लगा है,
मेरा होकर भी ये दिल मेरा, अब मुझसे डरने लगा है।
हर एक साँस में घुल रही है, तेरी यादों की ये वहशत,
मेरे कानों में गूँजती है, बस तेरी खामोश चाहत।
ये खामोशी का शोर है, जो चीखे चारों ओर है,
दिल में मेरे मच रहा, एक अनसुना सा शोर है।
ना रात कटती है यहाँ, ना दिन गुज़रता है,
तेरे बिना हर एक लम्हा, सदियों सा लगता है।
वो तेरी हँसी की गूँज अब, कानों में चुभती है जैसे,
कहा था ‘साथ ना छोड़ेंगे’, वो वादा भूला तू कैसे?
तेरी खुशबू जो बसी है, मेरे घर के हर कोने में,
एक पल को हँसाती है, फिर मजबूर करती रोने में।
हर एक धड़कन पूछती है, क्यों मिली थी ये मोहब्बत,
मेरे कानों में गूँजती है, बस तेरी खामोश हसरत।
ये खामोशी का शोर है, जो चीखे चारों ओर है,
दिल में मेरे मच रहा, एक अनसुना सा शोर है।
ना रात कटती है यहाँ, ना दिन गुज़रता है,
तेरे बिना हर एक लम्हा, सदियों सा लगता है।
कभी लगता है यहीं पे है तू, मेरे आस-पास है कहीं,
पर जब छूना चाहूँ तुझको, वहाँ होता कोई नहीं।
ये परछाइयाँ जो नाचती हैं, बंद कमरों के अँधेरों में,
ये तू है या मेरा वहम है, उलझा हूँ इन फेरों में।
तोड़ दे इस चुप्पी को, या ले ले मेरी जान तू,
इस अज़ाब-ए-ज़िन्दगी से, दे दे अब अमान तू।
किस गुनाह की सज़ा है ये, बता तो दे एक बार,
क्यों मेरा इश्क़ ही बन गया, मेरे लिए दीवार।
अब तो आदत सी हो गयी है, इस शोर में जीने की,
तेरे नाम का ज़हर है ये, धीरे-धीरे पीने की।
मेरी नब्ज़ में तू बहता है, मेरी रूह पे तेरा पहरा है,
ये ज़ख्म जो तूने दिया, दिखता नहीं पर गहरा है।
ये खामोशी का शोर है, जो चीखे चारों ओर है,
दिल में मेरे मच रहा, एक अनसुना सा शोर है।
ना रात कटती है यहाँ, ना दिन गुज़रता है,
तेरे बिना हर एक लम्हा, सदियों सा लगता है।
खामोशी का शोर…
ये शोर…
सोने नहीं देता…
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई
रूह तक है इसमें समाई
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई
बस चारों तरफ है ख़ुदाई… तेरी यादों की
बंद कमरों में घुटता है दम, साँसें भी लगती हैं भारी
दीवारों पे चलता है हर पल, तेरे अक्स का साया ज़ारी
हर एक चीज़ जो तेरी थी, अब वो मुझको डराती है
तेरी ख़ामोशी की चीख़ें, नींद से मुझे जगाती हैं
लगता है तू यहीं कहीं है, बस एक पर्दा दरमियाँ है
ये वहम है या है हक़ीक़त, मुझको ये कैसा गुमाँ है
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई, रूह तक है इसमें समाई
तेरी यादें बनके ख़ौफ़, मुझको हर पल देती हैं दुहाई
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई, जैसे कोई गहरी खाई
जिसमें गिरता जाता हूँ मैं, मिलती नहीं है रिहाई
हवा में घुली है तेरी ख़ुशबू, जो ज़हर बन के उतरी है
मेरे दिल के हर एक कोने में, तेरी सूरत ही बस छपी है
वो तेरी हँसी की गूँज अब, कानों में चुभती है ऐसे
वीरान घर के गलियारों में, कोई रोता हो जैसे
लगता है तू यहीं कहीं है, मुझे छू कर अभी गुज़री है
ये सर्द हवा या तेरी साँसें, मेरी रूह को जिसने छेड़ी है
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई, रूह तक है इसमें समाई
तेरी यादें बनके ख़ौफ़, मुझको हर पल देती हैं दुहाई
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई, जैसे कोई गहरी खाई
जिसमें गिरता जाता हूँ मैं, मिलती नहीं है रिहाई
साँसें हैं पर ज़िंदा नहीं मैं, एक चलता फिरता साया हूँ
तेरे जाने के बाद मैं, खुद को भी कहाँ ढूँढ पाया हूँ
क्यों छीन ली मेरी दुनिया? क्यों दे दी ये सज़ा?
इस क़ैद-ए-ग़म से मुझको, कोई तो दे दे रिहा
चाँद भी लगता है अब बेनूर, तारों में वो चमक नहीं
हर आहट पे दिल धड़कता है, तुझमें और वहम में फ़र्क नहीं
आईने में जब भी देखूँ, तू ही नज़र आती है
मेरी अपनी ही परछाई, अब मुझसे घबराती है
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई, रूह तक है इसमें समाई
तेरी यादें बनके ख़ौफ़, मुझको हर पल देती हैं दुहाई
ये जो है दहशत-ए-तन्हाई, जैसे कोई गहरी खाई
जिसमें गिरता जाता हूँ मैं, मिलती नहीं है रिहाई
अब तो इसी अँधेरे से है, मेरा रिश्ता हर एक पहर का
मेरी तक़दीर का ये साया, है एक अंतहीन सफ़र का
मेरी सिसकियाँ ही मेरा संगीत, मेरे आँसू ही ज़ुबाँ हैं
इस दहशत के सिवा अब बोलो, मेरे लिए यहाँ क्या है?
दहशत-ए-तन्हाई…
बस… तन्हाई…
मेरी तन्हाई…
तेरी यादों का ज़हर…
मेरे जिस्म में… रेंगता है…
धोखे का खंज़र… सीने में… धँसता है…
वो रातें चांदनी, वो बातें तेरी मीठी सी
मेरी हर एक साँस, बस तुझपे ही तो बीती थी
तेरी आँखों की झील में, मेरा ही तो अक्स था
मैंने तो तुझको ही, अपना खुदा माना था
क्यों भरम ये मेरा, पल में तोड़ दिया?
सिसकियाँ भरती हैं, अब ये रातें काली
तेरी खुशबू से अब तक, ये हवाएं नहीं खाली
मेरी हर धड़कन पूछती है, एक ही सवाल मुझसे
कैसे यकीन कर लिया, मैंने झूठे वादों पे तेरे?
धोखे का खंज़र तूने, पीठ पे नहीं, रूह में मारा है
मेरी वफ़ा का तूने, हर एक सपना उजाड़ा है
मेरे इश्क़ का तूने, कैसा ये सिला दिया
ज़िंदा हूँ मैं लेकिन, जीने का मज़ा ही छीन लिया
धोखे का खंज़र… आहिस्ता… आहिस्ता…
दीवारों पे अब भी, तेरे हँसने के निशां हैं
मेरे कानों में गूंजती, तेरी खामोशियाँ हैं
हर आहट पे लगता है, कि तू लौट आया है
पर दरवाज़े पे खड़ा, बस तेरा ही साया है
ये साया भी तेरा, अब मुझे डराता है
सिसकियाँ भरती हैं, अब ये रातें काली
तेरी खुशबू से अब तक, ये हवाएं नहीं खाली
मेरी हर धड़कन पूछती है, एक ही सवाल मुझसे
कैसे यकीन कर लिया, मैंने झूठे वादों पे तेरे?
धोखे का खंज़र तूने, पीठ पे नहीं, रूह में मारा है
मेरी वफ़ा का तूने, हर एक सपना उजाड़ा है
मेरे इश्क़ का तूने, कैसा ये सिला दिया
ज़िंदा हूँ मैं लेकिन, जीने का मज़ा ही छीन लिया
धोखे का खंज़र… आहिस्ता… आहिस्ता…
बंद कमरों में अब, तेरी तस्वीरें जलाता हूँ
धुएं में भी चेहरा, तेरा ही मैं पाता हूँ
तेरे दिए वो ख़त, अब राख़ बन चुके हैं
मेरे सारे जज़्बात, ख़ाक में मिल चुके हैं
इस आग में मेरा, सब कुछ जल गया
क्या कमी थी मेरे प्यार में, बस इतना बता दे
या किसी और की चमक ने, तुझे अँधा बना दिया?
मैंने तो रूह का कफ़न भी, तेरे नाम कर दिया था
तूने उसी कफ़न को, मेरे लिए दागदार कर दिया
क्यों… क्यों… क्यों?
धोखे का खंज़र तूने, पीठ पे नहीं, रूह में मारा है
मेरी वफ़ा का तूने, हर एक सपना उजाड़ा है
मेरे इश्क़ का तूने, कैसा ये सिला दिया
ज़िंदा हूँ मैं लेकिन, जीने का मज़ा ही छीन लिया
धोखे का खंज़र… चीरता है… मुझे…
धोखे का… खंज़र…
…रूह में…
तेरी आँखें, क़ातिल निगाहें…
साँसें रोक दें, तेरी अदाएं…
तेरी आँखें, क़ातिल निगाहें…
सूनी रातों में जब चाँद ढलता है
तेरा चेहरा सायों में बनता है
याद है वो पल, वो पहली मुलाक़ात
अनजान था मैं, क्या थी तेरी ज़ात
हर लफ़्ज़ तेरा जादू सा लगता था
एक कशिश थी, एक गहरा नशा था
धीरे धीरे दिल ये मेरा फँसता गया
मैं तुझको अपनी दुनिया समझता रहा
ओ, क़ातिल निगाहें तेरी, खंजर सी गहरी
छीन लीं मुझसे मेरी रातें सुनहरी
ज़ख्म ऐसा दिया, जो अब भरता नहीं
अब तेरे बिना ये दिल मरता भी नहीं
हाँ, मरता भी नहीं…
टूटा आईना हूँ, बिखरा साज़ हूँ
अपने ही वजूद से मैं नाराज़ हूँ
तेरी हर बात में जो मीठा ज़हर था
पीता गया मैं, ये कैसा कहर था
मेरी रूह पे अब तक तेरा पहरा है
वही कशिश है, वही गहरा नशा है
हर पल ज़ेहन मेरा तुझमें फँसता गया
मैं आज भी तुझको दुनिया समझता रहा
ओ, क़ातिल निगाहें तेरी, खंजर सी गहरी
छीन लीं मुझसे मेरी रातें सुनहरी
ज़ख्म ऐसा दिया, जो अब भरता नहीं
अब तेरे बिना ये दिल मरता भी नहीं
हाँ, मरता भी नहीं…
वो मोहब्बत थी या कोई फरेब था
तेरा ये हुस्न कितना अजीब था
रूह को छुआ, फिर रूह को ही नोच लिया
जीते जी मुझको तूने मौत दिया
ये कहानी अब तक अधूरी है
तेरी यादों की ये भूलभुलैया
जिसमें खोया है मेरा सवेरा
साँसें घुटती हैं, पर दम निकलता नहीं
इस अंधेरे से कोई रास्ता मिलता नहीं
चारों तरफ बस तेरा ही चेहरा है… तेरा ही चेहरा…
ओ, क़ातिल निगाहें तेरी, खंजर सी गहरी
छीन लीं मुझसे मेरी रातें सुनहरी
ज़ख्म ऐसा दिया, जो अब भरता नहीं
अब तेरे बिना ये दिल मरता भी नहीं
अब तो बस धड़कनों का शोर है
हर तरफ़ तेरी यादों का ज़ोर है
खत्म होती नहीं कहानी ये मेरी
अधूरी है तेरे बिन ज़िंदगानी ये मेरी
तेरे बिन… सब कुछ वीरान है…
क़ातिल निगाहें…
बस… तेरी निगाहें…
लहूलुहान… मेरा दिल…
क़ातिल…
तेरी निगाहें…
Others are Special Version.
Music has always been one of the most powerful ways to express emotions that words alone cannot capture. With Heartbreak Diaries (Vol. 3): Yaadon Ka Zeher, artist Abu Sayed delivers a haunting and deeply emotional album that explores the darker side of love and memory.
Released on 19 March 2026, the album is the third installment of the Heartbreak Diaries series. While the earlier albums focused on love and loneliness, this chapter dives deeper into the psychological impact of heartbreak — where memories themselves become poison.
The title Yaadon Ka Zeher translates to “The Poison of Memories.” It reflects the emotional state where past love continues to haunt someone long after the relationship has ended.
Each song in the album captures a different stage of heartbreak — grief, regret, longing, emotional collapse, and ultimately acceptance.
The music blends Bollywood ballad style with cinematic dark romance elements, creating an atmosphere that feels both nostalgic and haunting.
The album consists of seven tracks, each telling its own emotional story.
Khoon Ke Aansu opens the album with intense emotional pain, portraying a broken heart crying metaphorical “tears of blood.”
Qatra Qatra Maut explores the slow emotional death that comes from losing someone you once loved deeply.
Zehreeli Mohabbat reflects on love that once felt beautiful but eventually turned toxic.
Aakhri Saans Baaki closes the emotional arc with a sense of fading hope and lingering memories.
The album also includes special versions of key tracks, offering alternate arrangements that emphasize the emotional depth of the songs.
The sound design of the album combines:
These elements together create a cinematic listening experience that feels like the soundtrack of a tragic love story.
As the artist, composer, producer, and lyricist, Abu Sayed maintains complete creative control over the project. This allows the album to feel deeply personal and emotionally authentic.
His storytelling approach transforms each track into a chapter of a larger narrative — the journey of someone trying to survive the emotional aftermath of love.
With Yaadon Ka Zeher, the Heartbreak Diaries trilogy reaches its most intense emotional stage. The album captures the moment when memories stop being comforting and start becoming painful reminders of what was lost.
For listeners who enjoy sad romantic music, emotional storytelling, and cinematic Bollywood-style songs, this album offers a powerful and immersive experience.
00:00 Khoon Ke Aansu
07:09 Qatra Qatra Maut
13:03 Zehreeli Mohabbat
18:31 Aakhri Saans Baaki
24:44 Qatra Qatra Maut (Special Version)
31:07 Zehreeli Mohabbat (Special Version)
36:42 Aakhri Saans Baaki (Special Version)
आँखों से अब पानी नहीं,
देखो लहू बहता है…
मेरा इश्क़ अब रूह बनकर,
तुझसे ये कहता है…
खामोशी चीखती है इन खाली कमरों में,
तेरी ही परछाई दिखती है दीवारों में।
साँसें भी अब तो बोझ सी लगती हैं,
हर घड़ी तेरी यादें ज़हर सी चखती हैं।
ये रातें अब डसने को आती हैं मुझे।
हर वादा तेरा, एक काँटा बनके,
मेरे दिल में है चुभके…
हर लम्हा जो संग था, एक अंगारा बनके,
मेरी रूह को है दहके…
ये इश्क़ नहीं, ये है सज़ा, जीने की कोई नहीं वजह,
तेरे दिए ज़ख्मों को सी रहा हूँ,
मैं रोता हूँ खून के आँसू, मैं जीता नहीं, बस जी रहा हूँ।
तेरा वो काला जादू, अब भी मुझपे तारी है,
मैं रोता हूँ खून के आँसू, ये कैसी लाचारी है।
तेरी हँसी की गूंज अब, कानों में चुभती है,
वो फूलों की खुशबू भी, अब आग सी लगती है।
जिन राहों पे चलते थे हम हाथ थाम कर,
वही राहें अब पूछती हैं तेरा नाम लेकर।
हर मोड़ पर बस तेरा ही धोखा खड़ा है।
हर सपना तेरा, एक शीशा बनके,
मेरी आँखों में है टूटके…
हर धड़कन मेरी, एक तड़पन बनके,
मुझसे ही है रूठके…
ये इश्क़ नहीं, ये है सज़ा, जीने की कोई नहीं वजह,
तेरे दिए ज़ख्मों को सी रहा हूँ,
मैं रोता हूँ खून के आँसू, मैं जीता नहीं, बस जी रहा हूँ।
तेरा वो काला जादू, अब भी मुझपे तारी है,
मैं रोता हूँ खून के आँसू, ये कैसी लाचारी है।
क्या यही थी मोहब्बत तेरी? एक जलता हुआ ख़्वाब?
मेरी हर दुआ का तूने, दिया ये कैसा जवाब?
रूह काँप जाती है मेरी, जब तेरा अक्स आता है,
प्यार का वो हर एक पल, अब मुझे डराता है।
बंद आँखों में भी, तू ही तो दिखती है,
एक डरावना साया बनकर, साथ मेरे चलती है।
तेरी यादों की ज़ंजीरों में, मैं क़ैद हो गया हूँ,
ज़िंदा हूँ पर अंदर से, मैं ख़त्म हो गया हूँ।
मेरी हर साँस पर अब तेरा ही पहरा है।
अब तो अँधेरे से दोस्ती है, तन्हाई मेरा घर है,
ना कोई मंज़िल है मेरी, ना कोई अब सफ़र है।
मिटा दिए हैं तूने तो, मेरे वजूद के हर निशाँ,
कैसे कहूँ कि ले ली है, तूने ही मेरी जान।
दर्द का ये समंदर बहुत गहरा है।
ये इश्क़ नहीं, ये है सज़ा, जीने की कोई नहीं वजह,
तेरे दिए ज़ख्मों को सी रहा हूँ,
मैं रोता हूँ खून के आँसू, मैं जीता नहीं, बस जी रहा हूँ।
तेरा वो काला जादू, अब भी मुझपे तारी है,
मैं रोता हूँ खून के आँसू, ये कैसी लाचारी है।
खून के आँसू…
बस खून के आँसू…
मेरी आँखों से…
बस खून के आँसू…
साँसें ये ज़हरीली…
यादें पथरीली…
घुटता है दम…
क़तरा क़तरा मौत… धीरे धीरे सनम…
वो गलियाँ अब लगती हैं अनजान सी
जिनपे लिखी थी हमने अपनी कहानी
तेरी हँसी की गूँज अब एक चीख़ है
वक्त की सुई जैसे मुझपे ही चीन्ही
अंधेरों से अब दोस्ती है मेरी
परछाइयाँ भी बातें करती हैं तेरी
हर आहट पे दिल सहम जाता है
ये वहम मुझको हर पल भरमाता है
ये इश्क़ तेरा, क़तरा क़तरा मौत है
हर याद तेरी, गहरी सी एक चोट है
जीता हूँ लेकिन, ज़िंदगी अब रौथ है
ये इश्क़ तेरा, क़तरा क़तरा मौत है
बंद कमरे में बिखरी तेरी निशानियाँ
जैसे पुरानी कोई भुली कहानियाँ
तस्वीर तेरी तकती है यूँ मुझे
जैसे पूछती हो, “क्या खता थी मेरी?”
ये रातें अब सदियों सी लंबी हैं
आँखों में नींदें नहीं, बस नमी है
हर सपना एक डरावना सा मंज़र है
मेरे ही अंदर धंसा कोई खंजर है
ये इश्क़ तेरा, क़तरा क़तरा मौत है
हर याद तेरी, गहरी सी एक चोट है
जीता हूँ लेकिन, ज़िंदगी अब रौथ है
ये इश्क़ तेरा, क़तरा क़तरा मौत है
तेरी खुशबू जो हवा में है घुली हुई
जैसे कोई सज़ा हो मुझको मिली हुई
साँस लेता हूँ तो जलती है छाती
तेरी मौजूदगी की वहशत है सताती
आईने में चेहरा अब मेरा नहीं लगता
कोई साया है जो चुपके से है हँसता
धड़कनें भी अब तो बोझ सी लगती हैं
रूह मेरी जिस्म से हर दिन झगड़ती है
क्या तुम्हें भी कभी याद आती है मेरी?
या बस मैं ही हूँ क़ैदी तेरी यादों का?
ये खामोशी जो चीखती है हर पहर
जवाब है क्या तेरे पास इन सवालों का?
टूट रहा हूँ… बिखर रहा हूँ…
ये इश्क़ तेरा, क़तरा क़तरा मौत है
हर याद तेरी, गहरी सी एक चोट है
जीता हूँ लेकिन, ज़िंदगी अब रौथ है
ये इश्क़ तेरा, क़तरा क़तरा मौत है
क़तरा… क़तरा…
मौत…
क़तरा… क़तरा… सनम…
ये मोहब्बत है…
या मौत का साया है…
मेरे दिल में तूने…
कैसा ज़हर मिलाया है…
पहली नज़र में लगा, जैसे कोई दुआ मिली
सदियों की तपस्या का, मुझको सिला मिली
तेरी हर एक मुस्कान पे, मैं खुद को हार बैठा
इक ख़ूबसूरत जाल में, मैं जान निसार बैठा
पर अब ये साँसें बोझ हैं, धड़कन में एक शोर है
ये दिल मेरा था कल तलक, अब इसपे किसका ज़ोर है
रातें बनीं डरावनी, दिन में भी चैन नहीं
ये ज़हरीली मोहब्बत तेरी, मुझको फ़ना कर रही
रग रग में उतर के मेरी, रूह को जुदा कर रही
ये कैसी लत है लगी, जो छूटती ही नहीं
तेरी यादों की क़ैद से, ये जान टूटती ही नहीं
दीवारों पे दिखता है, अब अक्स बस तेरा
मेरे ही घर में जैसे, हो मुझपे पहरा तेरा
तेरी ख़ुशबू हवाओं में, एक वहम सी लगती है
हर आहट पे लगता है, के तू ही कहीं हँसती है
हर पल एक वहशत का, मंज़र मेरे साथ है
मेरे हाथों में जैसे, बस ख़ालीपन का हाथ है
आँखों में नींद नहीं, बस अश्क़ों की नमी
ये ज़हरीली मोहब्बत तेरी, मुझको फ़ना कर रही
रग रग में उतर के मेरी, रूह को जुदा कर रही
ये कैसी लत है लगी, जो छूटती ही नहीं
तेरी यादों की क़ैद से, ये जान टूटती ही नहीं
क्या इश्क़ ऐसा होता है, जो साँसें छीन ले?
जो जीने की हर वजह, धीरे से छीन ले?
ये प्यार है या अज़ाब है, कोई तो बतलाए
इस दर्द के समंदर से, कैसे कोई बच पाए?
तेरे दिए हुए वो ख़त, अब आग से लगते हैं
वो वादे और वो क़समें, सब नाग से डसते हैं
भूलना चाहूँ तुझको, पर और याद आता है
मेरा हर एक ज़ख्म, तेरा ही नाम गाता है
ये ज़हरीली मोहब्बत तेरी, मुझको फ़ना कर रही
रग रग में उतर के मेरी, रूह को जुदा कर रही
ये कैसी लत है लगी, जो छूटती ही नहीं
तेरी यादों की क़ैद से, ये जान टूटती ही नहीं
अब तो ये आलम है, के खुद से डरता हूँ मैं
हर रोज़ थोड़ा थोड़ा, बिन मौत मरता हूँ मैं
ना ज़िन्दगी है बाकी, ना मौत ही आती है
तेरी मोहब्बत मुझको, बस यूँ ही तड़पाती है
ज़हरीली मोहब्बत…
रग रग में… तेरा ज़हर…
फ़ना… हो रहा हूँ…
हर पहर… हर पहर…
तेरा ज़हर…
मेरी रूह में तू है बाकी…
तुझमें ही मेरी… आखिरी सांस बाकी…
ये रातें अब बोलती नहीं, खामोशी चीखती है
तेरी तस्वीर दीवारों पर, एक साया दीखती है
हवाओं में घुली है तेरी, वो भूली सी कहानी
मेरी दुनिया तुझ बिन अब, है बस वीरान पानी
लगता है जैसे तू यहीं है, मेरे आस पास कहीं
क्या ये वहम है मेरा, या सच में तू है यहीं?
साए भी अब डरते हैं, मेरे खालीपन से
जब तक ना मिलूं तुझसे, ये जान अटकी रहेगी
मेरे जिस्म में तेरी खातिर, एक आखिरी सांस बाकी रहेगी
ये दिल धड़कना भूलेगा, पर नाम तेरा लेगा
मेरी मौत भी मेरे इश्क़ का, इम्तेहान बाकी रखेगी
वो तेरी हँसी की गूंज, कानों में ज़हर घोले
बंद कमरों के अँधेरे, कई राज़ गहरे खोलें
तेरी छुअन की यादें अब, मेरी चमड़ी जलाती हैं
ये सर्द रातें मुझको, तेरी कब्र पे बुलाती हैं
लगता है जैसे तू यहीं है, मेरे आस पास कहीं
क्या ये वहम है मेरा, या सच में तू है यहीं?
साए भी अब डरते हैं, मेरे खालीपन से
जब तक ना मिलूं तुझसे, ये जान अटकी रहेगी
मेरे जिस्म में तेरी खातिर, एक आखिरी सांस बाकी रहेगी
ये दिल धड़कना भूलेगा, पर नाम तेरा लेगा
मेरी मौत भी मेरे इश्क़ का, इम्तेहान बाकी रखेगी
आईने में देखूं तो, अक्स तेरा नज़र आये
मेरे लफ़्ज़ों से हर पल, बस नाम तेरा ही आये
ये कौन सा मोड़ है जहाँ, मैं खुद से बिछड़ गया
तेरा साया जिस्म बनके, मेरी रूह से जकड़ गया
शायद यही अंजाम था, हमारी अधूरी कहानी का
रूह भटकेगी मेरी भी, तेरे इश्क़ में रूहानी सा
अब फासले नहीं मिटेंगे, ना ये तड़प कम होगी
बस मौत ही शायद अब, मेरा आखरी मरहम होगी
धड़कनें धीमी हो रही, नज़र धुंधला रही है
लगता है तेरी दुनिया, मुझे पास बुला रही है
ये अँधेरा घना होकर, तुझको मुझमें मिला रहा
मेरा वजूद धीरे-धीरे, तुझमें ही समा रहा
जब तक ना मिलूं तुझसे, ये जान अटकी रहेगी
मेरे जिस्म में तेरी खातिर, एक आखिरी सांस बाकी रहेगी
ये दिल धड़कना भूलेगा, पर नाम तेरा लेगा
मेरी मौत भी मेरे इश्क़ का, इम्तेहान बाकी रखेगी
आखिरी सांस…
बस एक सांस…
तेरे लिए…
बाकी… है…
Others are Special Version.
Heartbreak Diaries (Vol. 2): Tanhaiyon Ka Safar is not just an album; it is an emotional odyssey crafted by the gifted artist Abu Sayed. Released on March 18, 2026, this sonic masterpiece invites listeners to walk through the silent, rain-soaked streets of memory, where every whisper of the wind carries the weight of a forgotten love.
Blending the rich orchestration of cinematic Bollywood ballads with deeply personal, soulful vocals, Abu Sayed creates a universe where melancholy is beautiful. The album—titled Tanhaiyon Ka Safar (The Journey of Loneliness)—serves as a companion for anyone navigating the complex tides of heartbreak, nostalgia, and the quiet pain that lingers in the spaces between memories.
If you are a fan of sad romantic songs, emotional love songs, or the timeless appeal of nostalgic melodies, this album speaks directly to the soul. The atmospheric production and poetic lyricism capture the precise moment when love turns into memory, making it a perfect addition to playlists for rainy days, late-night drives, or moments of deep introspection.
Embark on the auditory journey of Tanhaiyon Ka Safar:
मेरी रूह… मेरी रूह…
गुमशुदा…
खामोशी की दीवारों से तेरी सदा आती है
टूटे आईने में तेरी ही शक्ल नज़र आती है
साँसें तो चलती हैं पर धड़कनें हैं रुकी हुई
मेरी दुनिया तेरे जाने से है कहीं खोई हुई
ये जिस्म तो है यहाँ, पर जान है लापता
हर आहट पे लगता है कि तूने पुकारा है
इन वीरान आँखों को बस तेरा ही सहारा है
ये कैसा वहम है, ये कैसा अँधेरा है
मेरा होकर भी अब कुछ भी ना मेरा है
मैं बन गया हूँ एक गुमशुदा रूह
तेरी यादों के सायों में मजरूह
ना दिन में चैन है, ना रातों में सुकूँ
ये इश्क़ मेरा बन गया मेरा जुनूँ
मेरी रूह… गुमशुदा…
वो बारिश की रातें, वो भीगी सी मुलाकातें
अब ज़हर सी लगती हैं वो तेरी मीठी बातें
जिस रास्ते पे चलते थे हम हाथ थाम कर
अब वो रास्ता भी पूछता है, गया तेरा हमसफ़र किधर
हर नज़ारा एक सज़ा है, हर लम्हा है पराया
हर आहट पे लगता है कि तूने पुकारा है
इन वीरान आँखों को बस तेरा ही सहारा है
ये कैसा वहम है, ये कैसा अँधेरा है
मेरा होकर भी अब कुछ भी ना मेरा है
मैं बन गया हूँ एक गुमशुदा रूह
तेरी यादों के सायों में मजरूह
ना दिन में चैन है, ना रातों में सुकूँ
ये इश्क़ मेरा बन गया मेरा जुनूँ
मेरी रूह… गुमशुदा…
कभी बंद कमरों में कोई परछाईं चलती है
तेरे ना होने की वहशत सीने में पलती है
अक्सर दीवारों पे दिखती है तेरी सूरत मुझे
ये मेरा पागलपन है या तू सच में है यहीं कहीं
ये तन्हाई अब एक मकड़ी का जाला है
अब ना कोई उम्मीद है, ना कोई तमन्ना है
इस रूह को तो बस अब भटकते ही रहना है
कहते हैं वक़्त हर ज़ख्म को भर देता है
मेरा ज़ख्म तो हर पल और गहरा होता है
मेरा वजूद अब एक अधूरा फ़साना है
क्या तू भी मुझे सोचकर यूँ ही बेचैन होती है?
या बस मेरी ही रूह इन अँधेरों में रोती है?
इक सवाल बन के रह गया है मेरा प्यार
क्या ख़त्म होगा कभी ये लंबा इंतज़ार?
या मैं ही क़ैद हूँ तेरी यादों की सलाखों में?
मैं बन गया हूँ एक गुमशुदा रूह
तेरी यादों के सायों में मजरूह
ना दिन में चैन है, ना रातों में सुकूँ
ये इश्क़ मेरा बन गया मेरा जुनूँ
मेरी रूह… गुमशुदा…
गुमशुदा…
मेरी रूह…
तेरे बिना…
मैं कुछ भी नहीं…
बस एक… गुमशुदा रूह…
आँखों में… बस एक नमी है…
साँसों में… तेरी ही कमी है…
ये कैसी लगी है… सदियों की प्यास है…
गुज़रता हूँ जब उन वीरान गलियों से
जहाँ वक़्त ठहरा है परछाइयों में
दीवारों पे लिखी हैं टूटी कहानियाँ
सिसकती हैं दरारों से तेरी निशानियाँ
हर आहट पे लगता है तूने पुकारा मुझे
एक धुंध सी छाती है, चारों पहर
दिल डूबता जाता है, गहरा, और गहरा
यादों का ज़हरीला है ये कैसा असर…
ये सदियों की प्यास है, जो बुझती नहीं
एक रूह की तलाश है, जो मिलती नहीं
हर जन्म में खोजा तुझे, हर मौत में हारा
मेरे नसीब का तू, टूटा हुआ तारा
ये कैसी सज़ा है… ये कैसी सज़ा है…
चेहरे बदलते हैं, आईने वही हैं
ज़माने गुज़र गए, हम भी अब वो नहीं हैं
पर आँखों के अंदर वो खालीपन वही है
तुझे खोने का वो अँधेरा घना वही है
हर चेहरे में तेरा ही अक्स ढूँढता हूँ
एक ख़ौफ़ सा रहता है, दिल के अंदर
जैसे रेत पे चल रहा हूँ, एक बंजर समंदर
हर साँस एक बोझ है मेरे जिस्म पर…
ये सदियों की प्यास है, जो बुझती नहीं
एक रूह की तलाश है, जो मिलती नहीं
हर जन्म में खोजा तुझे, हर मौत में हारा
मेरे नसीब का तू, टूटा हुआ तारा
ये कैसी सज़ा है… ये कैसी सज़ा है…
कभी लगता है ये मेरा वहम ही तो है
एक अधूरा सा, डरावना सा ख़्वाब ही तो है
शायद तुम थे ही नहीं, बस एक एहसास था
जो सदियों से मेरे जीने की इक आस था
पर ये दर्द हक़ीक़त की तरह चुभता क्यों है?
मैं भटकता हूँ बनके एक साया बेनाम
ना मेरी सुबह है, ना है कोई शाम
एक अंतहीन सफ़र, एक अंतहीन इंतज़ार
क्या मिलेगा कभी मुझे इस क़ैद से फ़रार?
या यही मेरी मंज़िल, यही मेरा अंजाम है?
क्या नाम था तेरा… मुझे याद भी नहीं…
कैसा था चेहरा तेरा… कोई फ़रियाद भी नहीं…
बस एक प्यास है, जो रूह को जलाती है
हर धड़कन में मौत का पैग़ाम लाती है
मेरे होने पर ही अब मुझे शक सा है…
ये सदियों की प्यास है, जो बुझती नहीं
एक रूह की तलाश है, जो मिलती नहीं
हर जन्म में खोजा तुझे, हर मौत में हारा
मेरे नसीब का तू, टूटा हुआ तारा
ये कैसी सज़ा है… ये कैसी सज़ा है…
सदियों की… ये प्यास…
बुझती नहीं…
एक तलाश…
मिलती नहीं…
ये प्यास… सदियों की प्यास…
कहाँ मिलेगी दवा? मेरे इस दर्द-ए-दिल की?
साँसें हैं ये सज़ा, या है ये कोई बेबसी?
रूह काँपे, दिल जले, हर तरफ बस तेरी कमी…
बस तेरी कमी…
अंधेरी रातें, ख़ामोश साये,
दीवारों से बस तेरी आवाज़ आये।
हर एक लम्हा सदियों सा गुज़रे,
बिन तेरे ये दिल अब कहाँ जाए।
ये ख़ालीपन एक ख़ौफ़ सा लगता है।
मेरी रूह में उतरा है, तेरा वो गहरा नशा,
भूलना चाहा जितना, उतना ही याद आया।
हर धड़कन पूछती है, क्या थी मेरी ख़ता?
तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा,
क्यूँ दी ये सज़ा, बस इतना बता।
मेरी अँधेरी दुनिया में, ना कोई है तेरे सिवा,
अब तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा।
वो भीगी आँखें, वो तेरा मुस्कुराना,
एक पल में सारी दुनिया को भूल जाना।
अब वही हँसी कानों में चुभती है,
तेरी परछाई भी अब मुझसे छुपती है।
हर ख़्वाब मेरा शीशे सा टूटा है।
मेरी रूह में उतरा है, तेरा वो गहरा नशा,
भूलना चाहा जितना, उतना ही याद आया।
हर धड़कन पूछती है, क्या थी मेरी ख़ता?
तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा,
क्यूँ दी ये सज़ा, बस इतना बता।
मेरी अँधेरी दुनिया में, ना कोई है तेरे सिवा,
अब तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा।
कमरे की हर चीज़ पूछती है तेरा पता,
आईने में अक्स तेरा, मुझसे ही है ख़फ़ा।
ये वहम है या हक़ीक़त, कुछ समझ ना पाऊँ,
मैं तुझमें खोकर, ख़ुद को कहाँ पाऊँ।
तेरी यादें ज़ंजीरें बन गयी हैं।
अब तो आदत सी है इन ज़ख़्मों संग जीने की,
तेरी यादों के सहारे अश्कों को पीने की।
कोई उम्मीद नहीं, ना कोई है आसरा,
बस तेरा ही ख़याल है जो देता है दिलासा।
ये दिलासा भी एक वहम सा लगता है।
ये कैसा माया-जाल है, कैसा है ये घेरा,
न तुझसे दूर जा सकूँ, न पास है सवेरा।
मेरी हर दुआ में तू, हर बद्दुआ में भी,
तुझसे ही शुरू ज़िन्दगी, ख़त्म भी तुझपे ही।
मेरी तक़दीर का फ़ैसला अब तू ही सुना।
तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा,
क्यूँ दी ये सज़ा, बस इतना बता।
मेरी अँधेरी दुनिया में, ना कोई है तेरे सिवा,
अब तू ही है दर्द-ए-दिल, तू ही उसकी दवा।
दवा… या सज़ा…
दर्द… बस दर्द…
तेरा दिया हुआ…
हमेशा के लिए…
दवा…
Others are Special Version.
Music Album “Heartbreak Diaries (Vol. 1): Ishq Aur Dard” is a deeply emotional collection of six hauntingly beautiful songs that explore the fragile nature of love, heartbreak, and the silent pain that lingers long after memories fade. Each track unfolds like a page from a personal diary—filled with longing, betrayal, nostalgia, and the echoes of unfinished love stories.
Through melancholic melodies, cinematic arrangements, and emotionally charged vocals, the album captures the complex feelings of a heart struggling between love and loss. The music blends melodic Bollywood ballads with modern electronic textures, soulful violin arrangements, atmospheric synth pads, and expressive guitar and bass, creating a powerful soundscape that perfectly mirrors the emotional depth of the lyrics.
The album showcases the lyrical brilliance of Abu Sayed, whose storytelling transforms personal emotions into universally relatable experiences. His words paint vivid pictures of broken promises, fading memories, and the quiet strength required to move forward after love leaves scars on the heart.
“Heartbreak Diaries (Vol. 1): Ishq Aur Dard” features three main songs, each telling a different chapter of heartbreak, accompanied by three special versions that reinterpret the original compositions with fresh emotional intensity and musical nuance.
The album includes:
• Jeete Ji Mar Gaye
• Bewafa Tera Masoom Chehra
• Toota Hua Dil Mera
Special Versions:
• Jeete Ji Mar Gaye (Special Version)
• Bewafa Tera Masoom Chehra (Special Version)
• Toota Hua Dil Mera (Special Version)
Together, these six unforgettable tracks form a powerful emotional journey—one that takes listeners through the depths of love, betrayal, remembrance, and healing. With its evocative storytelling and immersive musical atmosphere, “Heartbreak Diaries (Vol. 1): Ishq Aur Dard” invites listeners to lose themselves in a world where every note carries a memory and every lyric speaks to the heart.
साँसें हैं पर ज़िंदा नहीं
धड़कनें हैं पर दिल नहीं
ये जिस्म है बस, रूह नहीं
तेरे बिना मैं, कुछ भी नहीं
ये वीरान रातें, और तन्हाई का शोर
खींचता है मुझे, तेरी यादों का ज़ोर
दीवारों से अब तो, बातें करता हूँ मैं
तेरे जाने के ग़म से, हर रोज़ मरता हूँ मैं
हर आहट पे लगता है, तूने है पुकारा
पलट कर जो देखूँ, वहमों का है सहारा
मेरी दुनिया थी तुझसे, अब वीरान हो गयी
तेरी यादों के साये में, हर पल हम जले
क्या कहें किसी से, किस हाल में हम पले
तुम क्या गए सनम, हम तो संभल न सके
तेरे बिन हम यहाँ, जीते जी मर गए
हाँ, जीते जी मर गए
वो हँसना तेरा, वो नज़रें झुकाना
छोटी छोटी बातों पे, तेरा रूठ जाना
सब ज़ंग लगी यादें, सीने में हैं दफ़न
तेरे बिन ये जीवन, लगता है एक कफ़न
हर आहट पे लगता है, तूने है पुकारा
पलट कर जो देखूँ, वहमों का है सहारा
मेरी हस्ती थी तुझसे, अब गुमनाम हो गयी
तेरी यादों के साये में, हर पल हम जले
क्या कहें किसी से, किस हाल में हम पले
तुम क्या गए सनम, हम तो संभल न सके
तेरे बिन हम यहाँ, जीते जी मर गए
हाँ, जीते जी मर गए
आईने में चेहरा, लगता है अजनबी
खो गयी है मुझसे, मेरी ही हर खुशी
परछाइयों के पीछे, भागता रहता हूँ
अपने ही साये से, अब मैं डरता हूँ
किस्मत की लकीरों से, नाम तेरा मिटा
किस खता की है ये, रब ने हमको सज़ा
ना कोई मंज़िल है, ना कोई है सफ़र
बिखरा पड़ा हूँ मैं, अब तो इधर-उधर
रूह काँप जाती है, जब तेरा ज़िक्र हो
काश इन साँसों में, बस तेरी फिक्र हो
ये कैसा अँधेरा है, जिसमें रोशनी नहीं
तू ही बता दे मुझको, क्या ये ज़िन्दगी सही?
मेरी हर दुआ तुझपे ही आके रुकी
तेरी यादों के साये में, हर पल हम जले
क्या कहें किसी से, किस हाल में हम पले
तुम क्या गए सनम, हम तो संभल न सके
तेरे बिन हम यहाँ, जीते जी मर गए
हाँ, जीते जी मर गए
जीते जी… मर गए…
तेरे बिन… हम…
खामोशी में… खो गए…
मर गए…
बेवफ़ा, तेरा मासूम चेहरा,
मेरी तबाही का सामान हो गया।
तेरा मासूम चेहरा… हाँ तेरा…
याद हैं वो रातें, वो तेरी बातें,
क़समों वादों की वो सौग़ातें।
हर लफ़्ज़ तेरा एक जाल था गहरा,
मैं नासमझ, तुझमें खोता ही गया।
तेरी आँखों की झील में, डूबता ही रहा।
अब तो आईने में भी, अजनबी सा हूँ मैं,
तेरे साये का ख़ौफ़ है, हर कहीं अब यहाँ।
दिल पूछता है मुझसे, ये क्या हो गया?
वो हँसता हुआ शख़्स, कहाँ खो गया?
बेवफ़ा तेरा मासूम चेहरा, मुझे याद आता है,
दिल के वीराने में, एक ख़ंजर चलाता है।
रोशनी छीन ली, अँधेरों से रिश्ता जोड़ा,
उस भोलेपन ने ही, मेरा सबकुछ तोड़ा।
बेवफ़ा तेरा मासूम चेहरा…
बारिश की बूँदें अब, आँसू सी लगती हैं,
फूलों की ख़ुशबू में, ज़हर सी घुलती है।
तेरी हँसी की गूँज, कानों में चुभती है,
मेरी हर एक उम्मीद, अब राख बन चुकी है।
हर साँस एक सज़ा, लगती है मुझे।
आवारा फिरता हूँ, मंज़िल का ना पता,
हर मोड़ पे मिलती है, बस तेरी ही ख़ता।
रूह काँपती है, ये सवाल दोहराता है,
क्यूँ मेरा यक़ीन, यूँ बिखर जाता है?
बेवफ़ा तेरा मासूम चेहरा, मुझे याद आता है,
दिल के वीराने में, एक ख़ंजर चलाता है।
रोशनी छीन ली, अँधेरों से रिश्ता जोड़ा,
उस भोलेपन ने ही, मेरा सबकुछ तोड़ा।
ख्वाबों में भी अब तो, तेरा ही पहरा है,
फरिश्ता नहीं, कोई दैत्य सा चेहरा है।
चीख कर उठता हूँ मैं, नींदों से रात में,
जैसे फँस गया हूँ, तेरी काली करामात में।
ये कैसा इश्क़ था, जो वहशत बन गया।
तस्वीरें जला दीं, ख़त भी फाड़ दिए,
वो सारे तोहफ़े तेरे, मैंने उजाड़ दिए।
पर रूह पे जो नक़्श है, उसे कैसे मिटाऊँ?
बता तुझसे और तेरी यादों से, कहाँ जाऊँ?
हर जगह तू ही तू है, मैं किधर जाऊँ?
शायद मेरी ही आँखों पे, पर्दा था घना,
तेरे पत्थर दिल को, मैं हीरा समझ बैठा।
क्या वो मोहब्बत बस, एक किरदार था तेरा?
ये ज़ख़्म अब कभी, भर ना पाएगा मेरा।
एक जीता जागता, मैं लाश बन गया।
बेवफ़ा तेरा मासूम चेहरा, मुझे याद आता है,
दिल के वीराने में, एक ख़ंजर चलाता है।
रोशनी छीन ली, अँधेरों से रिश्ता जोड़ा,
उस भोलेपन ने ही, मेरा सबकुछ तोड़ा।
बेवफ़ा… तेरा मासूम चेहरा…
याद आता है…
तेरा चेहरा… मासूम चेहरा…
बेवफ़ा…
ये रातें अब डराती हैं, तेरी परछाई बुलाती है
खामोशी शोर करती है, मेरी रूह कांप जाती है
टूटा हुआ दिल मेरा, टूटा हुआ दिल मेरा…
काँच का था वो सपना, जो पल में ही बिखर गया
तेरी यादों का साया, रूह में ऐसे उतर गया
हर साँस में घुलता है, एक ज़हर सा गहरा
क्यों छोड़ दिया तन्हा, देके ये ज़ख्म गहरा?
अँधेरी गलियों में, अब ढूंढता हूँ सवेरा
तेरी ही थी रोशनी, अब हर तरफ़ है अँधेरा…
टूटा हुआ दिल मेरा, अब जुड़ ना पायेगा
ये इश्क़ का दरिया है, जो डूब ही जायेगा
सिसकती हैं दीवारें, पूछता है हर कोना
क्यों किस्मत में लिखा था, तुझे पाकर यूँ खोना?
तस्वीरें हैं तेरी, जो मुझसे बातें करती हैं
बीते लम्हों की खुशबू, इन हवाओं में रहती है
वो हँसना तेरा खिलके, वो आँखों का इशारा
लगता है सब एक धोखा, एक सपना था प्यारा।
अँधेरी गलियों में, अब ढूंढता हूँ सवेरा
तेरी ही थी रोशनी, अब हर तरफ़ है अँधेरा…
टूटा हुआ दिल मेरा, अब जुड़ ना पायेगा
ये इश्क़ का दरिया है, जो डूब ही जायेगा
सिसकती हैं दीवारें, पूछता है हर कोना
क्यों किस्मत में लिखा था, तुझे पाकर यूँ खोना?
मेरे ख्वाबों के महल में, अब भूतों का है डेरा
तेरी चाहत की आग ने, सब कुछ जला दिया मेरा
ये जिस्म तो है मेरा, पर जान तेरी ही थी
तुझ बिन ये ज़िन्दगी, एक सज़ा बन गयी।
आवाज़ें सुनता हूँ, अनजानी सी, बेगानी सी
लगता है मौत की आहट, है ये कोई कहानी सी
धड़कनें भी हैं भारी, चलती हैं रुक-रुक के
अब मौत ही है मंज़िल, जीते हैं मर-मर के।
कोई चीख़ मेरे अंदर, दब के रह जाती है
तेरी बेवफ़ाई की, दास्ताँ सुनाती है
नफ़रत भी करूँ कैसे, मोहब्बत जो इतनी थी
अब बस एक खालीपन है, और मेरी तन्हाई है।
टूटा हुआ दिल मेरा, अब जुड़ ना पायेगा
ये इश्क़ का दरिया है, जो डूब ही जायेगा
सिसकती हैं दीवारें, पूछता है हर कोना
क्यों किस्मत में लिखा था, तुझे पाकर यूँ खोना?
टूटा हुआ… दिल मेरा…
बस दर्द… और अँधेरा…
खत्म हुआ… किस्सा मेरा…
टूटा हुआ दिल मेरा…
Others are Special Version.
Music Album “Shraapit Dil” is an exhilarating collection of 6 mesmerizing songs that pulse with raw emotion and compelling storytelling, each one a vibrant thread in the rich tapestry of human experience. Every track delves into the universal themes of love, loss, and nostalgia, allowing listeners to profoundly connect with the powerful feelings that resonate within the music. The album brilliantly showcases the genius of the lyrics, masterfully crafted by the gifted Abu Sayed, whose remarkable talent for spinning relatable tales through his words adds immeasurable depth to the listening experience. Below, you will discover the lyrics that beautifully capture the heart and soul of this extraordinary album, beckoning listeners on a passionate musical voyage filled with introspection and sentiment. The album features 3 main songs that ignite the listener’s imagination, alongside 3 special reprise versions of those tracks, celebrating the rich versatility of the compositions and offering a refreshing take on the original themes, culminating in a total of 6 unforgettable songs that are bound to leave an indelible mark on the heart.
तुझपे ही हारा, तुझपे ही वारा
हुआ तुझपे ये दिल मेरा फना
तुझपे ही हारा, तुझपे ही वारा
हुआ तुझपे ये दिल मेरा फना
खामोशियाँ हैं दीवारों में
तेरा अक्स है अँधियारों में
चलती हवाएं भी पूछें तेरा पता
मैं हो गया हूँ खुद से लापता
मेरी हर धड़कन है तुझसे जुदा
कैसी ये चाहत की आग है
जो इश्क़ भी है, और दाग है
क्यों मेरी दुनिया तुझसे शुरू, तुझपे ख़तम?
क्यों मेरे ज़ख्मों का तू ही है मरहम?
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
तेरी चाहत में ये तबाह दिल हुआ
साँसों में घुला है ज़हर तेरा
रूह पे है बस पहरा तेरा
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
वो बारिशें भी अब तो जलाती हैं
तेरी यादें परछाईं बन चलती हैं
जो कसमें खाई थीं चाँदनी रातों में
वो खो गयी हैं झूठी तेरी बातों में
हर पल है अब तो जैसे कोई सज़ा
कैसी ये चाहत की आग है
जो इश्क़ भी है, और दाग है
क्यों मेरी दुनिया तुझसे शुरू, तुझपे ख़तम?
क्यों मेरे ज़ख्मों का तू ही है मरहम?
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
तेरी चाहत में ये तबाह दिल हुआ
साँसों में घुला है ज़हर तेरा
रूह पे है बस पहरा तेरा
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
अब आईनों से भी डर लगता है
हर चेहरा मुझको तेरा ही लगता है
ये रातें हैं या है कोई काली सज़ा
जीने की अब नहीं कोई भी वजह
मेरी साँसों का अब तुझ बिन क्या वास्ता
मेरी इबादत भी तू, मेरी शिकायत भी तू
इस टूटे दिल की आखिरी रियायत भी तू
न जी सकूँ, न मर सकूँ, ये कैसा है सितम
मेरी रूह के हर ज़र्रे में बस गए हो तुम
बस गए हो तुम…
तेरी आवाज़ कानों में है एक साया
मुझे मुझमें ही तूने है दफनाया
ये कहानी नहीं होगी अब कभी पूरी
रह गयी है हमेशा की ये दूरी
तू ही मेरी आख़री और पहली खता
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
तेरी चाहत में ये तबाह दिल हुआ
साँसों में घुला है ज़हर तेरा
रूह पे है बस पहरा तेरा
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
फना…
फना दिल…
तुझमें हुआ… फना…
मेरा दिल… फना…
पल पल तेरी याद, एक साये की तरह
साथ चलती है, मुझको डसती है
हाय… ये कैसी कसक है…
ख़ाली दीवारों से, बातें करता हूँ मैं
तेरी ही आहट पर, अब भी मुड़ता हूँ मैं
ये रातें हैं गहरी, घना है अँधेरा
हुआ जबसे तू जुदा, ना हुआ सवेरा
मेरी दुनिया तुझ बिन वीरान है
मेरी हर साँस में, घुल गयी तेरी कमी
आँखों में रहती है, बस एक बेबसी और नमी
धड़कनें पूछती हैं, कहाँ है वो हमदम?
पल पल तेरी याद, ज़ख्मों को कुरेदे
मेरी रूह का कफ़न, बनके ये ओढ़े
ना जीने देती है, ना मरने देती है
ये कैसी मोहब्बत है, जो बस दर्द देती है
आईने में अक्सर, तेरा चेहरा दिखे
हवा भी जो छू जाये, तेरा लहजा लगे
बिस्तर की सिलवटें, तुझको पुकारती हैं
तुझसे मेरी तन्हाई, हर रोज़ हारती है
हर चीज़ में बस तेरा ही गुमान है
मेरी हर साँस में, घुल गयी तेरी कमी
आँखों में रहती है, बस एक बेबसी और नमी
धड़कनें पूछती हैं, कहाँ है वो हमदम?
पल पल तेरी याद, ज़ख्मों को कुरेदे
मेरी रूह का कफ़न, बनके ये ओढ़े
ना जीने देती है, ना मरने देती है
ये कैसी मोहब्बत है, जो बस दर्द देती है
वो कसमें वो वादे, सब धुँआ हो गए
हम अपनी ही चाहत में, कहीं खो गए
तेरी हँसी की खनक, अब कानों में चुभती है
खुशियों की हर उम्मीद, अँधेरे में डूबती है
मेरा हर लम्हा तुझपे क़ुर्बान था
कभी लगता है तू, यहीं आस-पास है
एक सर्द सा एहसास, जो बहुत ख़ास है
दरवाज़े पे दस्तक, देती है तेरी याद
करती है मुझको, हर पल ये बर्बाद
मेरा दिल अब एक ख़ाली मकान है
ये वहम है मेरा, या तू है यहीं कहीं?
मेरी धड़कनों में तू, अब भी तो है वही
टूट कर चाहा था, टूट कर रह गया
दर्द का दरिया है, जो आँखों से बह गया
ये इश्क़ नहीं, मौत का सामान है… मेरा इम्तिहान है
पल पल तेरी याद, ज़ख्मों को कुरेदे
मेरी रूह का कफ़न, बनके ये ओढ़े
ना जीने देती है, ना मरने देती है
ये कैसी मोहब्बत है, जो बस दर्द देती है
पल पल… तेरी याद…
बस याद…
एक अँधेरा…
खामोशी…
तेरी याद… बस तेरी याद…
हाय…
ये रातें बुलाएँ, तेरी यादें सताएँ,
ज़ख्म दिए तूने नए नए।
साँसें ये जलाएँ, हमें कुछ ना भाए,
ज़ख्म दिए तूने नए नए।
दीवारों पे साये, तेरे चलते हैं,
खामोशी में नग़मे, तेरे बजते हैं।
मेरी हर एक धड़कन, क़र्ज़दार है तेरी,
हम तो जी रहे हैं, बस नाम के लिए ही।
हर पल है एक वहम, हर लम्हा है अँधेरा।
टूटे आईनों में, चेहरा तेरा ही दिखे,
जो लिखे थे ख़त, वो अब राख बन चुके।
कैसी है ये उलझन, कैसी ये सज़ा है?
ज़ख्म नए नए, तू दे गया फिर,
मेरे दिल के शहर में, मचा है क़हर।
ना दवा है कोई, ना कोई दुआ,
तेरे इश्क़ का ज़हर, रूह में घुल गया।
वो गलियाँ पुरानी, अब वीरान हैं,
मेरे हर एक क़िस्से, तुझसे ही बयान हैं।
हवाओं में घुली है, तेरी ही ख़ुशबू,
हर पल रहती है, बस तेरी जुस्तजू।
तू नहीं है फिर भी, हर जगह है तेरा बसेरा।
टूटे आईनों में, चेहरा तेरा ही दिखे,
जो लिखे थे ख़त, वो अब राख बन चुके।
कैसी है ये उलझन, कैसी ये सज़ा है?
ज़ख्म नए नए, तू दे गया फिर,
मेरे दिल के शहर में, मचा है क़हर।
ना दवा है कोई, ना कोई दुआ,
तेरे इश्क़ का ज़हर, रूह में घुल गया।
आँखें बंद करूँ तो, तू सामने आए,
जैसे कोई साया, पीछा ना छोड़ पाए।
ये इश्क़ नहीं था, था कोई वहम,
जिसने छीन ली है, मेरी साँसों की लय।
टूटता हूँ हर दिन, जुड़ने की आस नहीं।
ज़ंजीरें हैं तेरी यादों की पैरो में,
कैदी बन गया हूँ मैं इन अँधेरों में।
कोई रौशनी की अब उम्मीद नहीं है,
मेरी तक़दीर तुझसे ही जुड़ी रही है।
हर दुआ में माँगी, मैंने मौत की पनाह।
सोचा था मिटा दूँगा, हर निशाँ तेरा,
पर तेरी रूह ने है, मुझपे डाला डेरा।
अब तो बस मौत ही, दे सकती है पनाह,
क्यूँ किया तूने मुझको, इस तरह तबाह?
इस तरह तबाह…
ज़ख्म नए नए, तू दे गया फिर,
मेरे दिल के शहर में, मचा है क़हर।
ना दवा है कोई, ना कोई दुआ,
तेरे इश्क़ का ज़हर, रूह में घुल गया।
ज़ख्म… नए नए…
रूह में घुल गया…
तू दे गया… फिर…
Others are Special Version.
Music Album “Andheri Yaadein” features a collection of 6 captivating songs that resonate with deep emotions and powerful storytelling, each a testament to the intricate tapestry of human experience. Each track explores various themes of love, loss, and nostalgia, allowing listeners to connect with the profound feelings conveyed through the music. The album artfully showcases the artistry of the lyrics, which are skillfully penned by the talented Abu Sayed, whose ability to weave relatable tales through his words adds immense value to the listening experience. Below, you will find the lyrics that beautifully encapsulate the essence of this remarkable album, inviting listeners to embark on a heartfelt musical journey filled with introspection and sentiment. The album comprises 3 main songs that capture the listener’s imagination and 3 special reprise versions of those songs, highlighting the versatility of the compositions and offering a fresh perspective on the original themes, thus making a total of 6 songs that are sure to leave a lasting impression.
तेरी आहटें अब भी हैं यहाँ
तू वो साया है जो मिल ना सका
सिसकती हवा तेरा नाम ले
ये अँधेरा है जो ढल ना सका
बंद कमरों में तेरी खुशबू है
दीवारों पे तेरा अक्स ठहरा है
मेरी आँखों में जो ये नमी सी है
तेरे जाने का ये ज़ख्म गहरा है
ये खामोशी अब चीखती है मुझपे
हर एक धड़कन में एक इंतज़ार है
हर एक साँस में बस तेरी पुकार है
टूटता हूँ मैं हर लम्हा हर घड़ी
ये कैसा इश्क़ है कैसा खुमार है
ओ हमनवा मेरे तू क्यों जुदा हुआ
मेरी रातों का चाँद कहाँ खो गया
अधूरी कहानी अधूरा फ़साना
तू वो दर्द है जो मिल ना सका
तू वो ख्वाब है जो मिल ना सका
वो बारिश की रातें वो भीगी सी बातें
हाथों में तेरा हाथ वो झूठी सौगातें
अब यादें तेरी बनके चुभती हैं काँटे
वक़्त ने छीनी हैं मुझसे मेरी सारी रातें
मेरा हर रास्ता तुझपे ही आके रुका
हर एक धड़कन में एक इंतज़ार है
हर एक साँस में बस तेरी पुकार है
टूटता हूँ मैं हर लम्हा हर घड़ी
ये कैसा इश्क़ है कैसा खुमार है
ओ हमनवा मेरे तू क्यों जुदा हुआ
मेरी रातों का चाँद कहाँ खो गया
अधूरी कहानी अधूरा फ़साना
तू वो दर्द है जो मिल ना सका
कभी लगता है तू यहीं कहीं है
मेरी रूह की कोई परछाईं है
ये वहम है मेरा या है हक़ीक़त
मेरे होने में तेरी गवाही है
ये कैसा बंधन है जो कट ना सका
मेरी रूह के अँधेरों में तेरा बसेरा है
तू श्राप है मेरा या किस्मत का फेरा है
मैं जीता भी नहीं मैं मर भी ना पाऊँ
मेरी हर सुबह पे अब मौत का पहरा है
तेरी यादें एक मक़बरा हैं
मेरी हर सुबह पे अब मौत का पहरा है
तेरी यादें एक मक़बरा हैं
जिसमें दफ़्न मेरा हर सवेरा है
अब तो साँसें भी लगती हैं बोझ सी
आईना देखे तो सूरत लगे और किसी की
तेरी तस्वीर से बातें करता हूँ
इस पागलपन में है एक अजीब सी ख़ुशी
तेरे बिना मेरा वजूद जल ना सका
ओ हमनवा मेरे तू क्यों जुदा हुआ
मेरी रातों का चाँद कहाँ खो गया
अधूरी कहानी अधूरा फ़साना
तू वो दर्द है जो मिल ना सका
तू वो ख्वाब है जो मिल ना सका
जो मिल ना सका…
एक साया…
एक दर्द… जो मिल ना सका…
हमेशा… अधूरा…
ऐतबार क्यूँ किया…
मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया…
क्यूँ किया… ऐतबार…
काली रातों का ये गहरा सन्नाटा
तेरी यादों का ज़हन में है काँटा
हर आहट पे लगता है तू आई है
ये कैसी जुदाई है ये कैसी तन्हाई है
मेरे साये से भी अब डर लगता है
वो कसमें वो बातें सब खोखली थीं
मेरी साँसें तेरी साँसों में सो रही थीं
अब हर साँस एक खंजर सी लगती है
रूह मेरी हर पल जलती है
ऐतबार क्यूँ किया मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया
अपने हाथों से ये ज़हर क्यूँ पिया
जब तोड़ना ही था दिल मेरा तो प्यार क्यूँ किया
ऐतबार क्यूँ किया मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया
बंद कमरों में गूँजती हैं तेरी हँसी
जैसे दीवारों पे हो कोई परछाईं बनी
वो तस्वीरें जो हमने साथ खींची थीं
अब उनमें से बस तेरी आँखें दिखती हैं
घूरती हैं मुझको सवाल करती हैं
वो वादे वो रातें सब एक धोखा था
मेरा दिल तो बस तेरे लिए ही धड़का था
अब हर धड़कन एक चीख सी लगती है
रातें मेरी मुझको डसती हैं
ऐतबार क्यूँ किया मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया
अपने हाथों से ये ज़हर क्यूँ पिया
जब तोड़ना ही था दिल मेरा तो प्यार क्यूँ किया
ऐतबार क्यूँ किया मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया
तेरे दिए ज़ख्म अब नासूर बन गए
मेरे सारे सपने चकनाचूर हो गए
तेरी खुशबू हवा में जब घुल जाती है
मेरी रूह जिस्म में ही क़ैद हो जाती है
ये इश्क़ था या कोई भयानक सज़ा थी
मेरी रूह में तेरा साया है
मेरे खून में तेरी माया है
ना जी पाता हूँ ना मरता हूँ
बस हर लम्हा तुझसे डरता हूँ
ये वीराना दिल अब मेरा मक़बरा है
तेरा इश्क़ एक खौफ़नाक मंज़र बना है
अब तो आँसुओं ने भी साथ छोड़ दिया
मेरी आँखों के दरिया को भी सुखा दिया
एक ज़िंदा लाश बनके रह गया हूँ मैं
अपने ही अंदर कहीं ढह गया हूँ मैं
तेरे बिना हर पल मौत से बदतर है
ऐतबार क्यूँ किया मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया
अपने हाथों से ये ज़हर क्यूँ पिया
जब तोड़ना ही था दिल मेरा तो प्यार क्यूँ किया
ऐतबार क्यूँ किया मैंने तुझपे ऐतबार क्यूँ किया
ऐतबार… क्यूँ किया…
क्यूँ…
ये ज़हर… क्यूँ पिया…
मेरा दिल… क्यूँ तोड़ा…
ऐतबार… क्यूँ… किया…
ये रातें अब डसती हैं
तेरी यादें मुझमें बसती हैं
साँसों में घुला है ज़हर…
हाँ ज़हर…
खाली कमरा दीवारों पर साया तेरा
थम गया वक़्त जैसे हो हर पल अँधेरा
आईने में भी अक्स नज़र आता है तेरा
हर आहट पर लगता है तूने है पुकारा
लकीरों में लिखा था क्या यही फ़साना?
तुझसे मिलके फिर तुझसे ही दूर जाना?
मेरी हर दुआ क्यों हो गयी बेअसर?
हम तो किस्मत से हारे ओ मेरे यारा
बन गया इश्क़ हमारा एक दर्द का मारा
रूह काँपे दिल जले कोई नहीं सहारा
हम तो किस्मत से हारे किस्मत से हारा
वो बारिश की बूँदें जो छूती थीं हमको
तेरी हँसी की गूँजें जो कहती थीं सब कुछ
अब वही बूँदें जैसे तेज़ाब सी लगती हैं
वो सारी यादें अब एक ख़्वाब सी लगती हैं
किस मोड़ पे छूटा हाथों से हाथ तुम्हारा?
किस राह पे खोया मंज़िल का हर सितारा?
अब हर रास्ते पर है बस मौत का डर
हम तो किस्मत से हारे ओ मेरे यारा
अब हर रास्ते पर है बस मौत का डर
हम तो किस्मत से हारे ओ मेरे यारा
बन गया इश्क़ हमारा एक दर्द का मारा
रूह काँपे दिल जले कोई नहीं सहारा
हम तो किस्मत से हारे किस्मत से हारा
तेरे जाने से साँसें भी अब भारी हैं
जैसे हर पल मुझपे एक मौत तारी है
ये ख़ामोशी अब चीखें बनके चुभती है
तेरी परछाईं साये सा पीछा करती है
ना कोई दवा है ना कोई दुआ लगती है
ये इश्क़ की सज़ा है जो ताउम्र लगती है
अब तो अँधेरों से ही मैंने यारी कर ली
अपनी ही रूह मैंने गिरवी रख दी
कभी तो पूछोगे हवाओं से हाल मेरा?
क्या कभी आएगा तुम्हें भी ख़याल मेरा?
या बस मैं ही जलूँगा इस आग में अकेला?
इस कहानी का मैं ही था किरदार अकेला?
हम तो किस्मत से हारे ओ मेरे यारा
बन गया इश्क़ हमारा एक दर्द का मारा
रूह काँपे दिल जले कोई नहीं सहारा
हम तो किस्मत से हारे किस्मत से हारा
किस्मत से हारा…
हारा…
मेरी हर साँस… हर धड़कन…
किस्मत से… हारी…
हारा…
Others are Special Version.
⭐ Trusted by global clients | ⏱️ On-time delivery 📌 Services Include: 💻 Web & Mobile App Development 👨🏻💻 🎶 🎵 Custom Music Production ⚙️ Custom Software & Automation 🤖 AI-Powered Technical Solutions






