Shraapit Dil
- Music Album Relesed 17 March, 2026
- Language Hindi
- Lyrics written by Abu Sayed
- Songs 6
Music Album “Shraapit Dil” is an exhilarating collection of 6 mesmerizing songs that pulse with raw emotion and compelling storytelling, each one a vibrant thread in the rich tapestry of human experience. Every track delves into the universal themes of love, loss, and nostalgia, allowing listeners to profoundly connect with the powerful feelings that resonate within the music. The album brilliantly showcases the genius of the lyrics, masterfully crafted by the gifted Abu Sayed, whose remarkable talent for spinning relatable tales through his words adds immeasurable depth to the listening experience. Below, you will discover the lyrics that beautifully capture the heart and soul of this extraordinary album, beckoning listeners on a passionate musical voyage filled with introspection and sentiment. The album features 3 main songs that ignite the listener’s imagination, alongside 3 special reprise versions of those tracks, celebrating the rich versatility of the compositions and offering a refreshing take on the original themes, culminating in a total of 6 unforgettable songs that are bound to leave an indelible mark on the heart.
Fanaa Dil
तुझपे ही हारा, तुझपे ही वारा
हुआ तुझपे ये दिल मेरा फना
तुझपे ही हारा, तुझपे ही वारा
हुआ तुझपे ये दिल मेरा फना
खामोशियाँ हैं दीवारों में
तेरा अक्स है अँधियारों में
चलती हवाएं भी पूछें तेरा पता
मैं हो गया हूँ खुद से लापता
मेरी हर धड़कन है तुझसे जुदा
कैसी ये चाहत की आग है
जो इश्क़ भी है, और दाग है
क्यों मेरी दुनिया तुझसे शुरू, तुझपे ख़तम?
क्यों मेरे ज़ख्मों का तू ही है मरहम?
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
तेरी चाहत में ये तबाह दिल हुआ
साँसों में घुला है ज़हर तेरा
रूह पे है बस पहरा तेरा
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
वो बारिशें भी अब तो जलाती हैं
तेरी यादें परछाईं बन चलती हैं
जो कसमें खाई थीं चाँदनी रातों में
वो खो गयी हैं झूठी तेरी बातों में
हर पल है अब तो जैसे कोई सज़ा
कैसी ये चाहत की आग है
जो इश्क़ भी है, और दाग है
क्यों मेरी दुनिया तुझसे शुरू, तुझपे ख़तम?
क्यों मेरे ज़ख्मों का तू ही है मरहम?
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
तेरी चाहत में ये तबाह दिल हुआ
साँसों में घुला है ज़हर तेरा
रूह पे है बस पहरा तेरा
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
अब आईनों से भी डर लगता है
हर चेहरा मुझको तेरा ही लगता है
ये रातें हैं या है कोई काली सज़ा
जीने की अब नहीं कोई भी वजह
मेरी साँसों का अब तुझ बिन क्या वास्ता
मेरी इबादत भी तू, मेरी शिकायत भी तू
इस टूटे दिल की आखिरी रियायत भी तू
न जी सकूँ, न मर सकूँ, ये कैसा है सितम
मेरी रूह के हर ज़र्रे में बस गए हो तुम
बस गए हो तुम…
तेरी आवाज़ कानों में है एक साया
मुझे मुझमें ही तूने है दफनाया
ये कहानी नहीं होगी अब कभी पूरी
रह गयी है हमेशा की ये दूरी
तू ही मेरी आख़री और पहली खता
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
तेरी चाहत में ये तबाह दिल हुआ
साँसों में घुला है ज़हर तेरा
रूह पे है बस पहरा तेरा
फना दिल, फना दिल, मेरा फना दिल हुआ
फना…
फना दिल…
तुझमें हुआ… फना…
मेरा दिल… फना…
Pal Pal Teri Yaad
पल पल तेरी याद, एक साये की तरह
साथ चलती है, मुझको डसती है
हाय… ये कैसी कसक है…
ख़ाली दीवारों से, बातें करता हूँ मैं
तेरी ही आहट पर, अब भी मुड़ता हूँ मैं
ये रातें हैं गहरी, घना है अँधेरा
हुआ जबसे तू जुदा, ना हुआ सवेरा
मेरी दुनिया तुझ बिन वीरान है
मेरी हर साँस में, घुल गयी तेरी कमी
आँखों में रहती है, बस एक बेबसी और नमी
धड़कनें पूछती हैं, कहाँ है वो हमदम?
पल पल तेरी याद, ज़ख्मों को कुरेदे
मेरी रूह का कफ़न, बनके ये ओढ़े
ना जीने देती है, ना मरने देती है
ये कैसी मोहब्बत है, जो बस दर्द देती है
आईने में अक्सर, तेरा चेहरा दिखे
हवा भी जो छू जाये, तेरा लहजा लगे
बिस्तर की सिलवटें, तुझको पुकारती हैं
तुझसे मेरी तन्हाई, हर रोज़ हारती है
हर चीज़ में बस तेरा ही गुमान है
मेरी हर साँस में, घुल गयी तेरी कमी
आँखों में रहती है, बस एक बेबसी और नमी
धड़कनें पूछती हैं, कहाँ है वो हमदम?
पल पल तेरी याद, ज़ख्मों को कुरेदे
मेरी रूह का कफ़न, बनके ये ओढ़े
ना जीने देती है, ना मरने देती है
ये कैसी मोहब्बत है, जो बस दर्द देती है
वो कसमें वो वादे, सब धुँआ हो गए
हम अपनी ही चाहत में, कहीं खो गए
तेरी हँसी की खनक, अब कानों में चुभती है
खुशियों की हर उम्मीद, अँधेरे में डूबती है
मेरा हर लम्हा तुझपे क़ुर्बान था
कभी लगता है तू, यहीं आस-पास है
एक सर्द सा एहसास, जो बहुत ख़ास है
दरवाज़े पे दस्तक, देती है तेरी याद
करती है मुझको, हर पल ये बर्बाद
मेरा दिल अब एक ख़ाली मकान है
ये वहम है मेरा, या तू है यहीं कहीं?
मेरी धड़कनों में तू, अब भी तो है वही
टूट कर चाहा था, टूट कर रह गया
दर्द का दरिया है, जो आँखों से बह गया
ये इश्क़ नहीं, मौत का सामान है… मेरा इम्तिहान है
पल पल तेरी याद, ज़ख्मों को कुरेदे
मेरी रूह का कफ़न, बनके ये ओढ़े
ना जीने देती है, ना मरने देती है
ये कैसी मोहब्बत है, जो बस दर्द देती है
पल पल… तेरी याद…
बस याद…
एक अँधेरा…
खामोशी…
तेरी याद… बस तेरी याद…
हाय…
Zakhm Naye Naye
ये रातें बुलाएँ, तेरी यादें सताएँ,
ज़ख्म दिए तूने नए नए।
साँसें ये जलाएँ, हमें कुछ ना भाए,
ज़ख्म दिए तूने नए नए।
दीवारों पे साये, तेरे चलते हैं,
खामोशी में नग़मे, तेरे बजते हैं।
मेरी हर एक धड़कन, क़र्ज़दार है तेरी,
हम तो जी रहे हैं, बस नाम के लिए ही।
हर पल है एक वहम, हर लम्हा है अँधेरा।
टूटे आईनों में, चेहरा तेरा ही दिखे,
जो लिखे थे ख़त, वो अब राख बन चुके।
कैसी है ये उलझन, कैसी ये सज़ा है?
ज़ख्म नए नए, तू दे गया फिर,
मेरे दिल के शहर में, मचा है क़हर।
ना दवा है कोई, ना कोई दुआ,
तेरे इश्क़ का ज़हर, रूह में घुल गया।
वो गलियाँ पुरानी, अब वीरान हैं,
मेरे हर एक क़िस्से, तुझसे ही बयान हैं।
हवाओं में घुली है, तेरी ही ख़ुशबू,
हर पल रहती है, बस तेरी जुस्तजू।
तू नहीं है फिर भी, हर जगह है तेरा बसेरा।
टूटे आईनों में, चेहरा तेरा ही दिखे,
जो लिखे थे ख़त, वो अब राख बन चुके।
कैसी है ये उलझन, कैसी ये सज़ा है?
ज़ख्म नए नए, तू दे गया फिर,
मेरे दिल के शहर में, मचा है क़हर।
ना दवा है कोई, ना कोई दुआ,
तेरे इश्क़ का ज़हर, रूह में घुल गया।
आँखें बंद करूँ तो, तू सामने आए,
जैसे कोई साया, पीछा ना छोड़ पाए।
ये इश्क़ नहीं था, था कोई वहम,
जिसने छीन ली है, मेरी साँसों की लय।
टूटता हूँ हर दिन, जुड़ने की आस नहीं।
ज़ंजीरें हैं तेरी यादों की पैरो में,
कैदी बन गया हूँ मैं इन अँधेरों में।
कोई रौशनी की अब उम्मीद नहीं है,
मेरी तक़दीर तुझसे ही जुड़ी रही है।
हर दुआ में माँगी, मैंने मौत की पनाह।
सोचा था मिटा दूँगा, हर निशाँ तेरा,
पर तेरी रूह ने है, मुझपे डाला डेरा।
अब तो बस मौत ही, दे सकती है पनाह,
क्यूँ किया तूने मुझको, इस तरह तबाह?
इस तरह तबाह…
ज़ख्म नए नए, तू दे गया फिर,
मेरे दिल के शहर में, मचा है क़हर।
ना दवा है कोई, ना कोई दुआ,
तेरे इश्क़ का ज़हर, रूह में घुल गया।
ज़ख्म… नए नए…
रूह में घुल गया…
तू दे गया… फिर…
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